माँ

Read this hindi poem below..

Mother is just a feeling. No words can express her importance. this is a poem dedicated to all mothers around the earth. Comment your suggestions on this poem.

खुद को दर्द दे कर, उसने मुझे नया आकार दिया है
खुद अंधेरे में रेहकर, मुझे उज्जवल सँसार फ़िया है
ये जो कर्ज़ है तेरा मुझपे कभी चुका नही पाऊंगा माँ
तू ने खुद गिर कर , मुझे खड़ा होने का आधार दिया है ।।

वो कड़ी दोपहर हो या अमाबास की रात
तू मेरे लिए जगा करती है
मेरे घर लौटने तक भूका रहा करती है
में रूठ जाऊं तो तू उदास होती है
मगर सब कुछ भुलाके मुझे मनाया करती है

तू नजाने मुझमे, अपने आप को खो देती है
मेरे हंसी में खुश होती है ,और गम में रो देती है ।

कोई दिन नही गया होगा ,
जब मैने तुझपे गुस्सा न किया हो
मगर तू तो धैर्य की मूरत है ,सब सुन कर भी मुस्कुरा देती है
इतना बड़ा बोझ भी मत डाल तेरे एहसानों का
की उस बोझ तले दबे जाऊं
हर बिष पी कर , तू अमृत कैसे बना देती है ।।
तेरे दामन में लाखों सितारे होंगे के फलक
मगर मुझे जन्नत दिखता है
जब माँ मेरे सर पे अपनी हात फेर देती है ।
मुझे गीत ग़ज़ल की जरूरत नही
सुकून तो तब मिलता है जब माँ लोरी सुना देती है ।।
तेरे प्यार से सच्चा कोई चीज नही माँ
अगर धरती पर भगवान है तो तू ही माँ
तू राख को भी भिबूती बना देती है ।।
@un_lucky
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